पुलिस के नाम पर ठगी करने वाले दो बदमाश गिरफ्तार,यूपीकॉप एप डाउनलोड करके पीड़ित को मदद दिलाने के नाम पर करते थे ठगी,38 लोगों को कर चुके गुमराह
News By-नितिन केसरवानी
आजमगढ़: पुलिस के नाम पर ठगी करने वाले दो अंतरजनपदीय बदमाशों को जहानागंज और साइबर थाने की पुलिस ने सर्विलांस की मदद से आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर से सोमवार की रात को गिरफ्तार किया। दोनों बदमाश तरवां और जहानागंज में दर्ज मुकदमे के पीड़ितों को फोन करके उनसे नकद रुपये लेने के लिए आजमगढ़ आए थे। गिरफ्तार बदमाशों में अंकित यादव, निवासी भरई और दीनदयाल गादार, निवासी कनेर, टीकमगढ़,मध्यप्रदेश शामिल हैं। जहानागंज में लड़की के भगाने का मुकदमा दर्ज था। इसमें पीड़ित महिला ने अंकित चौहान निवासी मेहनगर पर लड़की को भगाने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे को लेकर गिरफ्तार अपराधी आजमगढ़ आए थे। बदमाश यूपीकॉप एप से एफआइआर डाउनलोड करके गूगल या निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से ग्राम प्रधान का नंबर लेकर पीड़ित का मोवाइल फोन नंबर प्राप्त करते थे। इसके वाद पीड़ित को फोन करके मुकदमे में मदद या गिरफ्तारी का भय दिखाकर उन्हें क्यूआर कोड भेजकर रपये मंगाते थे।
आरोपितों ने यूपी के साथ ही तमिलनाडु, दिल्ली, तेलंगाना,कर्नाटक, महाराष्ट्र,ओडिशा और छत्तीसगढ़ के थानों में दर्ज मुकदमे को यूपीकॉप एप से डाउनलोड करके 38 लेगों से लगभग सवा करोड़ रपये की ठगी की है। एएसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि 20 नवंबर को मेहनगर निवासी सविता को मेंहनगर थाने का सिपाही बनकर बदमाश ने फोन किया और कहा कि आपकी लड़की मिल गई है,उसे लेने जा रहा हूं। क्यूआर कोड भेज रहा हूं, उस पर 24 हजार रूपए भेज दीजिये। पीड़िता ने किसी तरह 22 हजार की व्यवस्था करके क्यूआर कोड पर रूपए भेज दिया। जब लड़की के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली,तो पीड़िता ने 25 नवंबर को जहानागंज थाने में तहरीर दी। सविता देवी ने पुलिस को बताया कि मोबाइल नंबर 9203117942 से फोन करके किसी ने अपने को मेहनगर थाने का सिपाही बताकर 22 हजार रुपये क्यूआर कोड के माध्यम से लिए हैं। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया। सोमवार को देर रात सूचना मिली कि अपराधी आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर के पास खड़े हैं।पुलिस ने दोनों को धर दबोचा।
कमीशन का लालच देकर मंगाते थे दूसरे लोगों का क्यूआर कोड
यूपीकॉप एप के माध्यम से थानो में दर्ज मुकदमों को डाउनलोड करके पीड़ितों को मदद या गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे ठगी करने वाले गिरफ्तार अपराधी अपने संपर्क के लोगों को कमीशन का लालच देकर उनका क्यूआर कोड मंगाते थे और पैसा आने के बाद उनकी कमीशन देकर बाकी रकम अपने पास रख लेते थे।