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मिट्टी माफिया ने रात के अंधेरे में खनन कर गंगा किनारे खेत में बना दिए 12 फुट गहरे गड्ढे

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News By- हिमांशु उपाध्याय/ नितिन केसरवानी

कौशाम्बी: सिराथू तहसील क्षेत्र में इस समय अवैध मिट्टी खनन माफियाओं के आतंक से जनता त्रस्त है माफियाओं ने अब अपनी गतिविधियों को केवल रात के अंधेरे तक सीमित नहीं रखा है बल्कि गंगा नदी के किनारे की संवेदनशील भूमि को भी नहीं बख्शा है जिससे पर्यावरणीय और कानूनी दोनों तरह का संकट खड़ा हो गया है स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन की कथित मिलीभगत पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है कड़ा गिरधरपुर गढ़ी बड़ा टीला गांव समेत पूरे सिराथू क्षेत्र में सूर्यास्त होते ही मिट्टी माफिया रात के बादशाह बन जाते हैं।

रात भर जेसीबी की तेज गड़गड़ाहट ट्रैक्टरों की टकाटक और डंपरों के हॉर्न व सायरन की आवाज से ग्रामीण सो नहीं पाते हैं ग्रामीणों की शिकायत है कि रात भर गांव में धूल और मिट्टी फैली रहती है ग्रामीणों ने बताया कि पहले दो हफ्ते मिट्टी सरकारी रोड निर्माण के नाम पर ले जाई जा रही थी लेकिन अब पिछले हफ्ते भर से यह मिट्टी सीधे निजी प्लांटों में पहुंचाई जा रही है अवैध खनन का दूसरा और अधिक गंभीर मामला गंगा नदी के किनारे सामने आया है यहां माफियाओं ने खनन करते हुए एक खेत में लगभग 12 फुट गहरा गड्ढा खोद डाला है सूत्रों के अनुसार यह भूमि सरकारी हो सकती है जबकि ग्रामीणों ने इसे सीताराम नामक किसान की जमीन बताया है किसान की निजी जमीन हो या सरकारी 12 फुट गहरा गड्ढा खोदना अवैध खनन के पैमाने और माफियाओं के बेखौफ इरादों को दर्शाता है दो सप्ताह से लूट ग्रामीणों के अनुसार यहां से निकाली जा रही मिट्टी भी पिछले एक हफ्ते से निजी प्लांटों में जा रही है जिससे स्पष्ट है कि खनन का एकमात्र उद्देश्य अवैध व्यावसायिक लाभ कमाना है।

जब इस गंभीर विषय पर जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने हमेशा की तरह गुमराह करने की कोशिश की अधिकारियों ने दावा किया कि मिट्टी सरकारी सड़कों पर जा रही है लेकिन मौके पर मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग और पड़ताल से पता चला कि यह बयान सरासर झूठा है मिट्टी सीधे निजी प्लांटों में जा रही है अधिकारियों का यह टालमटोल रवैया और तहसील के जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने की मुद्रा इस पूरे अवैध खेल में स्थानीय थाना और खनन विभाग लेखपाल की कथित मिलीभगत के गंभीर आरोपों को और पुख्ता करती है सवाल यही है कि लाखों की कीमत वाली सरकारी किसान भूमि को खोदकर बेचने की यह छूट इन माफियाओं को आखिर किस बड़े संरक्षण के दम पर मिली हुई है इस पूरे अवैध कारोबार का रात के अंधेरे में बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जो प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है और कठोर न्यायिक प्रशासनिक कार्रवाई की मांग करता है।

 

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