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डॉ. नीहारिका रश्मि : एक महान साहित्यकार, विचारक, पत्रकार और समाज परिवर्तन की प्रेरणा

डॉ. नीहारिका रश्मि : बहुमुखी प्रतिभा की धनी, उच्च विचारों वाली महान हस्ती

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डॉ. नीहारिका रश्मि : एक महान साहित्यकार, विचारक, पत्रकार और समाज परिवर्तन की प्रेरणा

 

डॉ. नीहारिका रश्मि : बहुमुखी प्रतिभा की धनी, उच्च विचारों वाली महान हस्ती

 

“डॉ. नीहारिका रश्मि : बहुमुखी प्रतिभा की धनी, फिल्म निर्माता एवं समाजसेविका”

 

डॉ. नीहारिका रश्मि का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे एक साहित्यकार, पत्रकार, फिल्म निर्माता, समाजसेविका, विचारक और उच्च मानवीय मूल्यों की प्रतिनिधि थीं। उनके जीवन का हर कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में प्रेरणास्रोत रहा। आपको बता दूं कि डॉ. नीहारिका रश्मि का जीवन संघर्ष, संवेदना, सृजन और सेवा की अनूठी मिसाल रहा। वे केवल एक साहित्यकार या फिल्मकार ही नहीं थीं, बल्कि उच्च विचारों वाली एक ऐसी व्यक्तित्व संपन्न विभूति थीं, जिनके चिंतन और कर्म ने समाज के अनेक वर्गों को प्रेरित किया। उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता, राजनीति, शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक चेतना – सभी क्षेत्रों में अपनी गहरी छाप छोड़ी।

 

 

साहित्यकार और लेखिका के रूप में योगदान

उनकी लेखनी केवल शब्दों का खेल नहीं थी, बल्कि समाज की पीड़ा, स्त्री की व्यथा, किसान और श्रमिक की मजबूरी, तथा मानवीय संबंधों की संवेदनशीलता का दर्पण थी। कहानी संग्रह “कांटों की नोंक से” और ग़ज़ल संग्रह “जिंदगीं हिसाबों की किताब” उनकी भावनात्मक गहराई और चिंतन की शक्ति को प्रकट करते हैं।

उनकी रचनाएँ किसी एक वर्ग या विषय तक सीमित नहीं थीं – वे सामाजिक न्याय, स्त्री विमर्श, राजनीतिक व्यवस्था की विसंगतियाँ और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ पिरोने में सक्षम थीं।

 

पत्रकारिता और राजनीतिक दृष्टिकोण

 

डॉ. नीहारिका रश्मि की पत्रकारिता स्वतंत्र, निष्पक्ष और साहसी विचारधारा का प्रतीक थी। वे राजनीतिक जीवन की विसंगतियों, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानताओं को अपनी लेखनी के माध्यम से उजागर करती थीं। उनकी सोच हमेशा जनपक्षीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित थी। वे मानती थीं कि साहित्य और पत्रकारिता केवल सौंदर्य और मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। उनका यह दृष्टिकोण उन्हें समकालीन साहित्यकारों और पत्रकारों की पंक्ति में विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।

 

फिल्म निर्माण और दृश्य कला में योगदान

 

फिल्म जगत में भी उन्होंने अपने विचारों को अभिव्यक्ति दी। उनकी लघु फिल्म “पानी देवता” को सी.एम.एस. नई दिल्ली फिल्म फेस्टिवल में सराहा गया। मानवाधिकार पर बनी “सीमा तिवारी का भविष्य गर्त में” और श्री विट्ठलभाई पटेल पर आधारित फिल्म उनकी वैचारिक गहराई और कलात्मक दृष्टि का प्रमाण है। वे मानती थीं कि फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और विचारों को प्रखर बनाने का माध्यम है।

 

शोध और अकादमिक उपलब्धियां

 

वर्ष 1994 में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से “मध्य प्रदेश के जेल उद्योगों का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” विषय पर पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त कर उन्होंने अकादमिक जगत में भी अपनी पहचान बनाई। उनके शोध ने जेल उद्योगों के आर्थिक, सामाजिक और सुधारात्मक पहलुओं को गहराई से सामने रखा।

 

उच्च विचार और सामाजिक चेतना

 

डॉ. रश्मि का मानना था कि जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित और पीड़ित वर्गों के उत्थान के लिए होना चाहिए। वे बच्चों और महिलाओं की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहतीं।

उनकी सोच में समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व जैसे लोकतांत्रिक मूल्य स्पष्ट दिखाई देते थे। वे मानती थीं कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब स्त्रियों को समान अधिकार, बच्चों को बेहतर शिक्षा और युवाओं को उचित अवसर प्राप्त हों।

 

चिकित्सा सेवा और मानवीय सरोकार

 

अपने ससुर स्व. डॉ. लक्ष्मी नारायण कौंतू से सीखी हुई होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा विधियों का उपयोग करते हुए उन्होंने सैकड़ों मरीजों का निःशुल्क उपचार किया। अनेक बार उनके उपचार से ऐसे रोगी भी स्वस्थ हुए जिन्हें बड़े चिकित्सक भी ठीक नहीं कर पाए थे। उनकी चिकित्सा सेवा केवल इलाज नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का विस्तार थी।

 

पारिवारिक जीवन और आदर्श मूल्य

 

डॉ. नीहारिका रश्मि पारिवारिक जीवन में भी उतनी ही आदर्शवादी रहीं। वे पं. गोपाल कृष्ण कौंतू (सेवानिवृत्त वरिष्ठ कल्याण अधिकारी, जेल विभाग) की धर्मपत्नी थीं। उनके दो पुत्र भवतोष और कार्तिकेय, पुत्रवधू श्रीमती चित्रा कौंतू और पौत्र पुखराज कौंतू हैं। परिवार में उन्होंने त्याग, सहयोग और संस्कारों की अमिट छाप छोड़ी।

उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि वे परिवार और समाज दोनों में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती थीं। उनके लिए मैं यानि कि मनीष कुमार राठौर एक और पुत्र व परिवार का सदस्य मानती थी ।

 

महान चिंतक और उच्च विचारक के रूप में विरासत

 

डॉ. नीहारिका रश्मि का जीवन हमें यह सिखाता है कि साहित्य और कला केवल रचनात्मकता का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम हैं। उन्होंने अपने लेखन, पत्रकारिता और फिल्मों के माध्यम से समाज को जागरूक किया, राजनीतिक विसंगतियों पर सवाल उठाए, स्त्रियों और वंचित वर्गों की आवाज़ को बुलंद किया और मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया।

उनके विचार हमेशा यथार्थ के धरातल से जुड़े रहे और उनकी कलम सच्चाई का आईना थी। वे मानती थीं – “लेखक की जिम्मेदारी केवल लिखना नहीं, बल्कि समाज के लिए एक नई दृष्टि गढ़ना है।”

 

अंतिम यात्रा और अमर स्मृति

 

किडनी की गंभीर बीमारी से जूझते हुए 27 अगस्त 2024 को उन्होंने इस संसार को अलविदा कह दिया। उनका जाना साहित्य, पत्रकारिता, सिनेमा और समाज सभी के लिए अपूरणीय क्षति है।

परंतु उनका जीवन, उनके विचार और उनकी रचनाएँ सदैव प्रेरणा देती रहेंगी। वे हमें यह याद दिलाती रहेंगी कि सच्चा साहित्यकार और पत्रकार वही है जो अपने युग का सच लिखे, समाज को आईना दिखाए और मानवता के पक्ष में खड़ा हो। ।

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