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सर्प काटने से की छात्रवासी कक्षा 7 की बालिका की हुई मौत।

सुरक्षा ,व्यवस्था को लेकर हास्टल प्रबंधन व जिम्मेदारो के कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवाल।

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सर्प काटने से की छात्रवासी कक्षा 7 की बालिका की हुई मौत।

 

सुरक्षा ,व्यवस्था को लेकर हास्टल प्रबंधन व जिम्मेदारो के कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवाल।

 

*अरविंद सिंह परिहार सीधी*

 

एक तरफ जहां प्रदेश एवं केंद्र सरकारो के द्वारा छात्रवासी बच्चों को सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने के लिए छात्रावास में कई कर्मचारियों की नियुक्ति कर सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करने के साथ अच्छी साधन सुविधा उपलब्ध कराने भारी भरकम राशि उपलब्ध कराई जा रही है। तथा सुविधा के लिए सुगम यातायात के लिए तमाम सड़कों का जाल बिछाए जाने का दावा किया जा रहा है लेकिन जब समाज के अंतिम छोर में जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के परिवारों के बच्चे बच्चियों की मौत का कारण जिम्मेवारों की लापरवाही, स्वास्थ्य सुविधा का उचित प्रबंध, तथा सुगम यातायात ना होना बताया जा रहा है सरकारों के दावे ढकोसले साबित हो रहे हैं। कुछ इसी तरह का मामला जिले के वनांचल क्षेत्र जनपद पंचायत कुसमी के आदिवासी बालिका छात्रावास खरबर का सामने आया है, जहां छात्रावास में कक्षा 7 में अध्यनरत बालिका पूजा बैगा पिता इंद्रपाल बैगा उम्र लगभग 13 वर्ष की मौत सर्प काटने से हो गई। जिनके मौत का कारण सड़क के आभाव साथ हॉस्टल प्रबंधन की लापरवाही एवं निष्क्रियता सामने आ रही है। बताया गया है कि हॉस्टल के बच्चों की जिम्मेदारी चौकीदार और रसोइयां के हवाले कर रखी गई थी। पदस्थ अधीक्षका का नकारत रहना बताया जाता हैं। घटना दिनांक को भी अधीक्षका के हॉस्टल में ना रहने की खबर है शायद यही कारण बना की 25 किलोमीटर की दूरी तय करने में 3 घंटे से अधिक का समय लग गया। वही 10 किलोमीटर की दूरी पर वस्तुआ तथा 15–20 किलोमीटर की दूरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मड़वास एवं खडौरा में उपचार न कराया जाकर 3 घंटे से अधिक समय व्यतीत कर परिजनों के साथ चौकीदार एवं रसोइयां निजी वाहन में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली पहुंचे। जहां पर दूसरे शिक्षक व अधीक्षक अनिल किशोर द्विवेदी, एवं अनशुइया प्रसाद तिवारी जो क्रमशः आदिवासी छात्रावास मझौली व अतरैला आश्रम की जिम्मेदारी संभाल रखे हैं के द्वारा कराया गया तब काफी देर से वहां अधीक्षिका पहुंची जिनकी उमरिया में रहने की खबर है जहां से मझौली की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है। ऐसे में हॉस्टल प्रबंधन तथा जिम्मेदारों की कर प्रणाली एवं जवाबदारी पर सवाल उठाना वाजिब है?

 

हॉस्टल की चौकीदार के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक घटना मंगलवार 26 अगस्त को प्रातः 4 बजे की बताई जा रही है जब बालिका छात्रावास में अपने चारपाई पर सोई हुई थी तभी सर्प चारपाई में चढ़कर उसे काट दिया बच्ची द्वारा तत्काल आश्रम के बॉर्डन एवं अन्य बच्चियों को बताया छात्रावास प्रबन्धन वाहन की व्यवस्था कर 7 बजे सुबह गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली लाए जहां समुचित उपचार किया जाकर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर द्वारा जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया गया, जिला चिकित्सालय में कुछ देर तक उपचार भी चला लेकिन बालिका को बचाया नहीं जा सका और उसकी मौत हो गई।

 

 

*क्षेत्र में शुगम समुचित यातायात सुविधा का आभास*

बताया जा रहा है कि खरबर से मझौली की दूरी लगभग 10 से 15 किलोमीटर है परंतु इस मार्ग में नदी होने के कारण बरसात के दिनों में पानी होने के कारण फोर व्हीलर वाहन नहीं निकल पाते मझौली जाने के लिए वस्तुआ, जोगी पहाड़ी होते हुए 25 से 30 किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है यदि अच्छी सड़क बनी होती तो बच्ची को लेकर आधे घंटे में अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और समय पर उपचार होता तो शायद उसकी जान भी बच जाती। मझौली तक पहुंचने में लगभग 3 घंटे से अधिक का समय लग गया यही देरी बालिका के मौत का कारण बनीं। वही खरबर क्षेत्र संजय टाइगर रिजर्व के कोर जोन में आता है जहां स्वास्थ्य सुविधा के लिए भवन निर्माण तथा आवागमन के लिए पुल व रपटा निर्माण प्रतिबंधित किया गया है।जिसको लेकर क्षेत्र में मातम एवं असंतोष व्याप्त है।

 

 

*छात्रावास प्रबंधन की रहती है खास जिम्मेदारी*

 

छात्रावास एवं आश्रमों के लिए समय-समय पर पर्याप्त बजट जारी किया जाता है ताकि अध्ययन करने वाले बालक बालिकाओं के सुरक्षा में कमी ना हो जिसके लिए 24 घंटे सेवा देने के लिए कई कर्मचारी तैनात किए गए हैं। समुचित साफ सफाई एवं प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए, अधीक्षक को नियमित रूप से संस्था में रहना चाहिए, प्राथमिक उपचार के लिए दवा किट भी होना चाहिए, अगर इन सभी बातों का सही तरीके से पालन होता तो शायद ऐसी घटना ना घटित होती।

 

*सामने आ रही हॉस्टल प्रबंधन की लापरवाही*

 

यदि हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी को देखा जाए तो इनकी काफी कुछ लापरवाही सामने आ रही हैं! लोगों की माने तो यदि बालिका का उपचार नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र बस्तुआ पोड़ी या खडौरा में कराया जाता तो बालिका की जान बचाई जा सकती थी। वही ग्रामीणों द्वारा छात्रावास का फोटो उपलब्ध कराते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया गया है उपलब्ध कराए गए फोटो वीडियो में हॉस्टल के पीछे एवं अगल-बगल खरपतवार खिड़कियों के ऊपर तक देखे जा रहे हैं शायद इन्हीं खरपतवारों से होते हुए सर्प खिड़की से अंदर प्रवेश कर बच्ची को डसा होगा। हालांकि इस फोटो वीडियो की पुष्टि अपना वेब पोर्टल एवं दैनिक समाचार पत्र नहीं करता। वही बताया जा रहा है कि रात में हॉस्टल की जिम्मेदारी चौकीदार व रसोइयां के छोड़ी गई थी यदि अधीक्षका वहां मौजूद होती तो शायद समय रहते स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा दिया जाता तो समय से उपचार किया जाकर जान बचाई जा सकती थी। हालांकि चौकीदार द्वारा बताया गया कि अधीक्षिका भी मौजूद थी लेकिन ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि अधीक्षिका मौजूद नहीं थी यहां केवल चौकीदार और रसोईया थी जिसका वास्तविक पता जांच के बाद ही चल पाएगा।

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