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धान और गेहूं उपार्जन, परिवहन और भण्डारण में होने वाली गड़बडियों को रोकने एकीकृत निगरानी तंत्र जल्द विकसित करें: मंत्री राजपूत

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भोपाल
मध्य प्रदेश में पिछले दिनों  EOW  के छापे में सामने आये करीब 5 करोड़ रुपये के धान उपार्जन घोटाले के बाद सरकार सख्त हो गई है, हाल ही में जबलपुर में भी नागरिक आपूर्ति निगम, राइस मिलर्स और और सोसायटियों के कर्मचारियों की मिलीभगत से एक ही जिले में करीब 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी के सबूत मिले जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश फर्जीवाड़े में शामिल 74 लोगों के खिलाफ जिले के 12 थानों में एफआईआर दर्ज की गई है। अब सरकार इन गड़बड़ियों पर नजर रखने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र बनाने जा रहा है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि धान और गेहूं उपार्जन, परिवहन और भण्डारण में सामने आने वाली गड़बडियों को रोकने के लिए एकीकृत निगरानी तंत्र जल्द विकसित करें। जिससे कहीं भी होने वाली गड़बड़ी का तत्काल पता लग जाये और उसपर एक्शन लिया जा सके।

खाद्य मंत्री राजपूत ने अफसरों को दिए ये निर्देश

खाद्य मंत्री ने अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं आयुक्त खाद्य को निर्देश दिये हैं कि धान और चावल के मिलिंग और परिवहन के दौरान वाहनों में जीपीएस सिस्टम आवश्यक रूप से लगवाने के साथ उसकी मॉनिटरिंग भी करें। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि मुख्यालय स्तर पर कन्ट्रोल कमांड सेन्टर बनाया जाए जिससे खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम एवं वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरे प्रदेश में भण्डारित किये गये उपार्जित धान एवं गेहूँ और चावल की मात्रा, परिवहन और मिलिंग की जानकारी एक ही क्लिक पर उपलब्ध हो जाए।

सदन को ये आश्वासन दिया है मंत्री ने

गौरतलब है कि खाद्य मंत्री राजपूत ने विधानसभा में सदन को आश्वस्त किया था कि उपार्जन, परिवहन, भण्डारण में गड़बड़ी रोकने के लिए एकीकृत प्रणाली विकसित कर होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम कसेंगे। सहकारिता विभाग के सहयोग से मिलकर गड़बड़ी करने वाली समितियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रखेगे।
सीएमआर की रैंडम जांच के निर्देश

प्रदेश में खरीफ उपार्जन वर्ष 2024-25 के तहत उपार्जित धान की मिलिंग का कार्य विभिन्न मिलर्स के माध्यम से जारी है। खाद्य मंत्री राजपूत ने प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम को 11 फरवरी 2025 को निर्देश दिये थे कि धान की मिलिंग कार्य उपरांत मानक गुणवत्ता के चावल प्राप्त करने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा मुख्यालय स्तर पर एक दल गठित कर मिलिंग के दौरान समय-समय पर सीएमआर की रैंडम जांच सुनिश्चित करें।
3 सदस्यीय दल करेगा जांच

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि खरीफ उपार्जन वर्ष 2024-25 में धान की मिलिंग उपरांत चावल की गुणवत्ता भारत शासन के निर्धारित मापदंडों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए एक 3 सदस्यीय दल नागरिक आपूर्ति निगम के द्वारा गठित किया गया है। टीम में मुख्यालय में पदस्थ सहायक महाप्रबंधक (परिदान), सहायक महाप्रबंधक (गु.नि.), गुणवत्ता नियंत्रक (मुख्यालय) को शामिल किया गया है। यह समिति समय-समय पर जिलों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के साथ उसी समय वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएगी।
EWO के छापे में 5 करोड़ का धान उपार्जन घोटाला आया सामने

आपको बता दें मध्य प्रदेश में सामने आये धान उपार्जन घोटाले के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर EOW  ने इस महीने की शुरुआत में प्रदेश व्यापी छापामार कार्यवाही की इसमें भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर EOW पुलिस अधीक्षक कार्यालयों की टीमों ने मिलकर 12 जिलों की 150 उपार्जन समितियों एवं 140 वेयर हॉउसेस पर छापे मारे थे जिसमें 19,910.53 क्विंटल धान की हेराफेरी के सबूत मिले जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये है।
धान की बोरियों में मिली थी भूसी, कांग्रेस ने PM Modi को लिखा पत्र   

खास बात रही कि सतना में EOW की टीम को कनक वेयर हाउस में 535 क्विंटल धान के स्थान पर भूसी मिली। वेयर हाउस में सेवा सहकारी समिति पिंडरा एवं सेवा सहकारी समिति हिरौंदी जिला सतना द्वारा धान का भण्डारण किया गया था। घोटाला सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबी आई से इसकी जाँच कराने के लिए पत्र भी लिखा है।
जबलपुर में सामने आया धान परिवहन घोटाला

उधर जबलपुर में धान परिवहन घोटाला सामने आया है, एक शिकायत के बाद कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जाँच समिति गठित कर जाँच कराई जिसमें पता चला कि जबलपुर जिले में अंतर-जिला मिलिंग के लिए बाहर भेजी जाने वाली धान को मिलर्स ने स्थानीय दलालों के जरिए बेच दिया। धान परिवहन के लिए 614 ट्रिप में से 571 का टोल नाकों पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। साथ ही, फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 307 ट्रिप में ट्रक की बजाय कारों के नंबर दर्ज किए गए।
30 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी, 74 लोगों पर FIR दर्ज  

शुरूआती जाँच में ही सामने आया कि 30 करोड़ 14 लाख 19 हजार 600 रुपये कीमत की 1 लाख 31 हजार 52 क्विंटल धान की हेराफेरी हुई, जाँच रिपोर्ट के बाद कलेक्टर के आदेश पर 74 व्यक्तियों के खिलाफ 12 थानों में 12 एफआईआर दर्ज की गई इसमें नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक सहित 13 कर्मचारी, 17 राइस मिलर और सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्रों से जुड़े 44 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं।

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