मध्यप्रदेश में इतिहास रचता समावेशी कप 2026
2200 से अधिक युवाओं ने खेल के ज़रिये समानता को जिया, 16 टीमें पहुँचीं राज्य-स्तरीय सुपर-16 में
भोपाल/हरदा – मध्यप्रदेश में खेल के माध्यम से लैंगिक समानता और युवा नेतृत्व को सशक्त करने वाली ऐतिहासिक पहल “समावेशी कप 2026” के जिला एवं तहसील स्तरीय लीग मुकाबले 26 दिसंबर 2025 से 05 जनवरी 2026 तक सफलतापूर्वक आयोजित किए गए। इस आयोजन ने खेल को सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बनाते हुए एक नई मिसाल कायम की है।
राज्य के 8 जिलों — हरदा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, विदिशा, गुना, राजगढ़ और छतरपुर के 12 खेल मैदानों पर आयोजित इन मुकाबलों में 184 मिक्स्ड-जेंडर टीमों के 2200 से अधिक युवा खिलाड़ियों ने भाग लिया। खिलाड़ियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि जब अवसर समान होते हैं, तो नेतृत्व और प्रतिभा हर युवा में निखरती है।
इन रोमांचक मुकाबलों के बाद 16 सर्वश्रेष्ठ टीमों का चयन राज्य-स्तरीय सुपर-16 राउंड के लिए किया गया है।
15–16 जनवरी को हरदा बनेगा समानता का सबसे बड़ा मैदान
अब यह अभियान अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। चयनित 16 टीमें 15 जनवरी 2026 को नेहरू स्टेडियम, हरदा में सुपर-16 मुकाबलों में आमने-सामने होंगी। वहीं 16 जनवरी 2026 को सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों के बाद समावेशी कप 2026 की चैंपियन टीम का निर्धारण किया जाएगा।
सम्मान और पुरस्कार — खेल के साथ सपनों की जीत
राज्य-स्तरीय मुकाबलों के समापन पर विजेता टीमों को निम्नलिखित नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे—
प्रथम पुरस्कार: ₹51,000
द्वितीय पुरस्कार: ₹31,000
तृतीय पुरस्कार: ₹21,000
चतुर्थ पुरस्कार: ₹11,000
ये पुरस्कार केवल धनराशि नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के संघर्ष, साहस और समानता के सपनों का सम्मान हैं।
यह सिर्फ क्रिकेट नहीं, सामाजिक बदलाव की कहानी है
समावेशी कप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि टीम की कप्तान अनिवार्य रूप से लड़की होती है, जबकि लड़के उप-कप्तान की भूमिका निभाते हैं। यह व्यवस्था न केवल खेल के मैदान पर, बल्कि समाज में भी समानता और सम्मान की संस्कृति को मजबूत करती है।
करीब 6 वर्ष पूर्व एक टीम से शुरू हुआ यह अभियान आज 200 से अधिक टीमों तक पहुँच चुका है। यह टूर्नामेंट उन रूढ़ियों को तोड़ रहा है जो आज भी खेल और नेतृत्व को पुरुषों तक सीमित मानती हैं। समावेशी कप का संदेश साफ है — नेतृत्व, खेल और सपने सबके हैं।
गाँव-गाँव से उठती समानता की आवाज़
इस लीग में भाग लेने वाले अधिकांश खिलाड़ी ग्रामीण और अर्ध-शहरी पृष्ठभूमि से आए हैं, जहाँ लड़कियों को मैदान तक पहुँचने का अवसर भी सीमित होता है। समावेशी कप ने उन्हें न केवल खेल का मंच दिया, बल्कि कप्तानी, निर्णय और नेतृत्व का अधिकार भी सौंपा।
परिवारों, समुदायों और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक खेल प्रतियोगिता से आगे बढ़ाकर सामाजिक अभियान का स्वरूप दे दिया है।
समावेशी कप 2026 — “हक़ है समान, सभी का है मैदान”
समावेशी कप 2026 आज मध्यप्रदेश में समानता, सम्मान और सशक्त युवा नेतृत्व का प्रतीक बनकर उभर रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
यह पहल सिनर्जी संस्थान द्वारा युवाओं के नेतृत्व, लैंगिक न्याय और समान अवसरों की दिशा में मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा जमीनी प्रयास बन चुकी है जहाँ हर रन सिर्फ स्कोर नहीं, बल्कि बराबरी की ओर एक कदम है।
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