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बरगवां नाथ मंदिर मेला बन गया अवैध वसूली का अड्डा दुकानदारों पर ‘बैठकी शुल्क’ की चोरीखोरी के आरोप, प्रशासन पर सवाल

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बरगवां नाथ मंदिर मेला बन गया अवैध वसूली का अड्डा

 

 

दुकानदारों पर ‘बैठकी शुल्क’ की चोरीखोरी के आरोप, प्रशासन पर सवाल

 

 

अनूपपुर: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला बरगवां नाथ मंदिर मेला इस बार अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से कहीं अधिक अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के मामलों के कारण सुर्खियों में है। स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों का आरोप है कि मेले के आयोजन से पहले ही नगर परिषद बरगवां-अमलाई के कुछ कर्मचारी बिना वैध रसीद के ‘बैठकी शुल्क’ वसूलते हुए पकड़े गए।

बिना रसीद वसूली, नियमों की खुली अवहेलना

नगर परिषद के नियम स्पष्ट हैं कि किसी भी प्रकार की शुल्क वसूली केवल अधिकृत रसीद के माध्यम से ही की जा सकती है। बावजूद इसके, मेले की तैयारी के दौरान दुकानदार अपने सामान सजाने में व्यस्त थे कि अचानक एक चश्माधारी व्यक्ति अपने दो सहयोगियों के साथ नकद राशि वसूलते हुए दिखाई दिया।

दुकानदारों का कहना है:

“न तो हमें कोई रसीद दी गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि यह शुल्क किस मद में लिया जा रहा है। जब रसीद मांगी गई तो टालमटोल किया गया।”

छोटे-बड़े सभी दुकानदारों से समान शुल्क, सुविधाओं का अभाव

अनोखी बात यह है कि छोटे और बड़े सभी दुकानदारों से समान राशि वसूली जा रही है, जबकि मेले में साफ-सफाई, पीने का पानी, शौचालय, सुरक्षा या बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

एक दुकानदार ने कहा:

“अगर पैसे देने से मना किया जाए तो दुकान लगाने ही नहीं दिया जाएगा। आखिर किस सेवा के बदले यह शुल्क वसूला जा रहा है?”

 

 

₹5 की डायरी में दर्ज ‘बैठकी वसूली’

 

 

मीडिया से बातचीत में दुकानदारों ने बताया कि कुछ कर्मचारी ₹5 की सस्ती डायरी खरीदकर खुद को नगर परिषद का अधिकारी बताकर दुकानदारों से वसूली कर रहे हैं। यह राशि सीधे कर्मचारी की जेब में जा रही है, जबकि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी या उपयंत्री इस दौरान प्रांगण में दिखाई नहीं दिए।

“हर वर्ष एक निर्धारित अधिकारी दुकानदारों से शुल्क वसूलता है और उसका हिसाब देता है। इस वर्ष मामला पूरी तरह बदल गया है। अब मेला नहीं, वसूली का नया अवसर बन गया है।”

नगर परिषद की चुप्पी और दुकानदारों का आक्रोश

नगर परिषद के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस पूरे मामले पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि कहीं यह अवैध वसूली संगठित और संरक्षित तो नहीं।

स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:

बिना रसीद वसूली करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

मेले में दुकानदारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

भविष्य में किसी भी प्रकार की वसूली केवल वैध रसीद के माध्यम से ही की जाए।

बरगवां नाथ मंदिर मेला, जो वर्षों से आस्था और सांस्कृतिक मिलन का प्रतीक रहा है, इस बार अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से विवादों में घिर गया है। सवाल यह उठता है कि वसूली गई राशि किसकी जेब में जा रही है और क्या नगर परिषद इस मामले में पूरी तरह निष्क्रिय है।

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