Breaking News in Primes

अंदर का गुस्सा और बाहर का दबाव: कृषि संचालक उमाशंकर भार्गव का दोहरा चेहरा?

मध्य प्रदेश कृषि विभाग के संचालक उमाशंकर भावनगर के बिगड़े बोल अधिकारियों को चमकाया:संचालक उमाशंकर भार्गव 

0 1

अंदर का गुस्सा और बाहर का दबाव: कृषि संचालक उमाशंकर भार्गव का दोहरा चेहरा?

 

मध्य प्रदेश कृषि विभाग के संचालक उमाशंकर भावनगर के बिगड़े बोल अधिकारियों को चमकाया:संचालक उमाशंकर भार्गव

 

मनीष कुमार राठौर

8109571743

 

भोपाल। मध्य प्रदेश के किसानों और अधिकारियों के बीच इन दिनों एक नाम चर्चा में है – आईएएस उमाशंकर भार्गव 2011 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी, जो वर्तमान में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक बनाए गए हैं , का हालिया बयान विभागीय अधिकारियों में हलचल मचा दी है। एक वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) मीटिंग में जिला अधिकारियों को धमकाते हुए उन्होंने कहा, “मैं किसी नेता या मंत्री की नहीं सुनता… मुझे किसी से कॉल या मैसेज कराने की गलती न करें।” एक उच्च पद पर बैठे अधिकारी के लिए यह भाषा शैली कितनी शोभा देती है, यह तो वे खुद जानें ? लेकिन इस बयान ने उनके कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं ? क्योंकि अभी कुछ समय पहले ही दायित्व मिला जिसके बाद विभाग में फैली गन्दगी को साफ करने के बजाय कॉन्फ्रेंस में जिलें के अधिकारियों से इस लहजे में बात करना कहां तक सही है ।

 

सिस्टम का ठेकेदार या सिस्टम के लिए खतरा?

 

भार्गव ने अधिकारियों को यह भी नसीहत दी कि “सिस्टम में रहो और सिस्टम से चलो।” लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह ‘सिस्टम’ किसका चलाया हुआ है? और इसी सिस्टम के तहत कृषि विभाग में ऐसे कई रिटायर्ड कर्मचारी हैं, जिन्हें एक्सटेंशन देकर सीधे ‘मलाईदार’ पदों पर बैठाया गया है। जानकारी के अनुसार, कुछ रिटायर्ड अधिकारियों को एक नहीं, बल्कि दो-दो, तीन-तीन पदों का अतिरिक्त प्रभार देकर उनसे काम लिया जा रहा है। ये वो कर्मचारी हैं जिनका अनुभव और शिक्षा के मामले में वर्तमान में पदस्थ अन्य अधिकारियों से कोई मुकाबला नहीं है, फिर भी उन्हें संरक्षण देना किस नीति के तहत आता है? में CAG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पहले ही विभागीय फंड के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लग चुके हैं, जहां किसानों के लिए बने फर्टिलाइजर डेवलपमेंट फंड का 90% हिस्सा सरकारी वाहनों और ड्राइवरों पर खर्च पाया गया।

 

जरूरत नहीं, फिर भी टारगेट: किसान या कंपनियां?

 

सूत्रों की मानें तो भार्गव का रवैया केवल भाषणों तक सीमित नहीं है। वह जिला उपसंचालकों पर उर्वरकों की सप्लाई के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन उर्वरकों की सप्लाई के लिए टारगेट दिए जा रहे हैं, वर्तमान फसल सीजन में उनकी आवश्यकता ही नहीं है। इसके बावजूद, विभागीय बैठकों और वीसी में अधिकारियों को जबरदस्ती लक्ष्य पूरा करने के लिए धमकाया जाना आम बात हो गई है। यह सवाल उठता है कि आखिर यह दबाव क्यों? क्या यह किसानों के हित में है, या फिर उर्वरक कंपनियों के शॉर्टकट निपटाने के लिए?

 

यह भी आरोप है कि विंध्याचल भवन में पदस्थ कई अधिकारी और कर्मचारी, जो रिटायरमेंट के बाद भी ‘जमे’ हुए हैं, उर्वरक कंपनियों से मिलीभगत कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि बचे हुए उर्वरक के नाम पर फर्टिलाइजर कंपनियों से शॉर्टकट करते हुए अनियमितताएं की जा रही हैं।

 

जांच का सवाल

 

गौरतलब है कि वर्तमान में कृषि विभाग के कई जिला अधिकारी ऐसे हैं, जिनके खिलाफ लोकायुक्त या अन्य एजेंसियों में जांच चल रही है। इसके बावजूद उन्हें कई प्रकार के प्रभार देकर संरक्षण प्रदान किए जाने की बात कही जा रही है में कांग्रेस ने भी हालिया आईएएस तबादलों पर सवाल उठाते हुए भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!