लोकेसन-धामनोद
संवाददाता मोनू पटेल
धामनोद क्षेत्र में एक बार फिर सिवरेज विभाग की घोर लापरवाही और बदहाल सड़कों ने मासूम बच्चों की जान खतरे में डाल दी। करोड़ों रुपये के दावों और कागजी विकास की हकीकत उस वक्त सामने आ गई, जब स्कूली बच्चों से भरी एक बस असंतुलित होकर सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे में जा घुसी। यह गड्ढा सिवरेज कार्य के बाद ठीक से सड़क मरम्मत न करने का नतीजा बताया जा रहा है।
घटना के समय बस में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सवार थे। जैसे ही बस गड्ढे में फंसी, बच्चों में चीख-पुकार मच गई। बस का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका था और कुछ ही सेकंड में एक बड़ा हादसा हो सकता था। सौभाग्यवश बस पलटी नहीं, अन्यथा गंभीर जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।
इस भयावह स्थिति में स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने मानवता और सूझबूझ का परिचय दिया। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे, बस को सहारा देकर पलटने से बचाया और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। बच्चों के सुरक्षित निकलने के बाद ही अभिभावकों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिवरेज विभाग द्वारा सड़क को खोदकर महीनों से जर्जर हालत में छोड़ दिया गया है। जगह-जगह गहरे गड्ढे जानलेवा बन चुके हैं। कई बार शिकायतें और आवेदन देने के बावजूद विभाग और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहे।
घटना के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का सवाल है कि क्या किसी बड़े हादसे या मासूमों की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा? जवाबदार अधिकारियों को फोन लगाए गए, लेकिन किसी ने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा।
यह घटना सिवरेज विभाग की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक उदासीनता और स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगी