लोकेशन धामनोद
संवाददाता मोनू पटेल
*माँ नर्मदा महाविद्यालय में माँ नर्मदा साहित्य परिषद का गरिमामयी शुभारंभ*
धामनोद। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर माँ नर्मदा महाविद्यालय, धामनोद साहित्य, संस्कृति और सृजनात्मक चेतना के उज्ज्वल रंगों से सराबोर दिखाई दिया। विद्या, विवेक और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना के साथ महाविद्यालय परिसर में माँ नर्मदा साहित्य परिषद का भव्य एवं विधिवत शुभारंभ श्रद्धा, उल्लास और शैक्षणिक गरिमा के वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसने समूचे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना से आलोकित कर दिया। इस अवसर पर सीबीएमओ डॉ. बोरासी, महाविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. मनोज नाहर, डायरेक्टर डॉ. रीना नाहर तथा प्राचार्य डॉ. प्रिया त्रिवेदी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।
अपने प्रेरक उद्बोधन में डॉ. मनोज नाहर ने साहित्य परिषद की स्थापना को विद्यार्थियों के बौद्धिक और भावनात्मक विकास की दिशा में एक सशक्त पहल बताते हुए कहा कि “साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि संवेदनाओं, विचारों और संस्कारों का जीवंत माध्यम है। यह परिषद विद्यार्थियों को अभिव्यक्ति का आत्मविश्वास और सृजन का संस्कार प्रदान करेगी।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि परिषद के माध्यम से लेखन, वाचन, मंच संचालन एवं विचार प्रस्तुति के अवसर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।
डॉ. रीना नाहर ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में बसंत पंचमी के सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक महत्व को अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने माघ मास, हिंदू पंचांग के महीनों तथा भारतीय परंपरा में उनके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और सृजन के नव आरंभ का उत्सव है।” उनका उद्बोधन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक होने के साथ-साथ प्रेरणा से भरपूर रहा।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को जीवंत बना दिया। काव्य, विचार और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन उपस्थित जनसमूह के लिए गर्व और उल्लास का विषय बना।
समारोह के समापन अवसर पर प्राचार्य डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य परिषद महाविद्यालय में सृजनशीलता, संवेदना और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन का सशक्त माध्यम बनेगी।
कार्यक्रम का सुसंगठित, प्रभावशाली एवं गरिमामयी संचालन प्रो. सिद्धि शुक्ला द्वारा किया गया। अंत में उपस्थित अन्य शिक्षकों एवं स्टाफ सदस्यों की सहभागिता ने आयोजन को और अधिक स्मरणीय बना दिया। यह कार्यक्रम निश्चित ही महाविद्यालय के साहित्यिक इतिहास में एक प्रेरणास्पद और गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में अंकित हुआ।