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मां नर्मदा एकेडमी में श्रीराम मंदिर निर्माण वर्षगांठ पर श्रद्धा और संस्कृति का भव्य उत्सव* मर्यादा, त्याग और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ गूंजे राममय स्वर

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लोकेशन धामनोद
संवाददाता मोनू पटेल

*मां नर्मदा एकेडमी में श्रीराम मंदिर निर्माण वर्षगांठ पर श्रद्धा और संस्कृति का भव्य उत्सव*

मर्यादा, त्याग और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ गूंजे राममय स्वर

धामनोद मां नर्मदा एकेडमी के तत्वावधान में आज अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की वर्षगांठ के पावन अवसर पर एक भव्य एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक उल्लास और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत इस आयोजन ने उपस्थित जनसमुदाय में गौरव की अनुभूति का संचार किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के संचालक डॉ. मनोज नाहर द्वारा सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। प्रारंभिक क्षणों से ही वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो उठा। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने भजन “मेरे झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। साथ ही सावित्रीबाई फुले एक्ट, शबरी एक्ट तथा देशभक्ति गीतों की सशक्त प्रस्तुतियों ने सामाजिक चेतना, नारी सशक्तिकरण और राष्ट्रभक्ति के संदेश को प्रभावी रूप से मंच पर साकार किया।

इस अवसर पर संस्था के संचालक डॉ. नाहर एवं संचालिका रीना नाहर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श—सत्य, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य—आज भी जीवन के पथ को आलोकित करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को आत्मसात कर ही एक सशक्त, संस्कारित और राष्ट्रनिर्माण में अग्रणी समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने आचरण, अध्ययन और सेवा भाव से देश के उज्ज्वल भविष्य में सहभागी बनें।

संस्था के प्राचार्य डॉ. जितेंद्र पाराशर ने विद्यार्थियों को अनुशासित, लक्ष्यपूर्ण एवं नैतिक मूल्यों से युक्त जीवन जीने का संकल्प दिलाते हुए कहा, कि संस्कार और शिक्षा का समन्वय ही जीवन को सार्थक बनाता है।

कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन शिक्षक कपिल पटेल द्वारा किया गया एवं कार्यक्रम में विशेष योगदान माधुरी पवार, बलराम सांवले, सोनू भालसे, इत्यादि ने किया।वहीं अंत में हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के साथ कार्यक्रम का भावपूर्ण समापन हुआ।

कार्यक्रम में संस्था के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संपूर्ण आयोजन धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रप्रेम का अनुपम संगम बनकर सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध हुआ।

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