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ग्राम पंचायत खामला में सरपंच के भ्रष्टाचार के खिलाफ घमासान*  *पंचायत के 19 पंचों ने सरपंच के खिलाफ एसडीएम को सौंपा अविश्वास प्रस्ताव*

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*ग्राम पंचायत खामला में सरपंच के भ्रष्टाचार के खिलाफ घमासान*

 

*पंचायत के 19 पंचों ने सरपंच के खिलाफ एसडीएम को सौंपा अविश्वास प्रस्ताव*

 

भैंसदेही/ललित छत्रपाल :- मुख्यालय तहसील के खामला ग्राम पंचायत में पंचायत राजनीति गरमा गई है। तीन साल के असंतोष के बाद सभी 19 पंचों ने सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला दिया है। मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत यह कदम उठाया गया, जो पंचायत स्तर पर सरपंच के खिलाफ अविश्वास की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करता है। लंबे समय से चले आ रहे आरोप पंचों का कहना है कि 2023 से पंचायत में शासकीय कार्यों के संचालन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। विकास कार्यों में लापरवाही बरती गई और लाखों रुपये की कथित हेराफेरी भी सामने आई। ग्रामीणों और पंचों ने कई बार शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे असंतोष चरम पर पहुंच गया।

 

*सोमवार को भैंसदेही तहसील कार्यालय में प्रस्ताव सौंपा*

सोमवार को खामला पंचायत के सभी 19 पंच एकजुट होकर भैंसदेही तहसील कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) अजित मरावी को नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव सौंपा। पंचायत अधिनियम के अनुसार, कम से कम दो-तिहाई पंचों (यहां सभी 19) के समर्थन से यह प्रस्ताव वैध है। एसडीएम ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए कहा कि आगे की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होगी। सरपंच सहित सभी संबंधित पक्षों को 7 दिनों के अंदर नोटिस जारी किया जाएगा।पंचायत अधिनियम के तहत प्रक्रियामध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40(2) के अनुसार:अविश्वास प्रस्ताव तहसीलदार या एसडीएम को सौंपा जाता है।प्रस्ताव पर 15 दिनों में विशेष बैठक बुलाई जाती है।दो-तिहाई बहुमत से पारित होने पर सरपंच को पद से हटाया जाता है और नए चुनाव कराए जाते हैं।

इस मामले में प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है, जो पंचायत लोकतंत्र की मजबूती दर्शाता है। गांव में हलचल तेज, ग्रामीणों की नजरें प्रशासन पर प्रस्ताव सौंपने के बाद खामला गांव में चर्चाओं का दौर चल पड़ा है। ग्रामीण प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजरें लगाए हैं। यह मामला न केवल पंचायत स्तर पर, बल्कि तहसील और जिला प्रशासन के गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में निर्णय पंचायत सुशासन के लिए मिसाल कायम कर सकता है।

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