150 करोड़ की सड़क में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल,नागौद–मैहर मार्ग पर गुणवत्ता से खुला समझौता
PWD की महत्वाकांक्षी परियोजना में DPR को नजरअंदाज करने के आरोप, सॉफ्ट स्टोन और बिना WMM प्लांट के काम का दावा
150 करोड़ की सड़क में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल,नागौद–मैहर मार्ग पर गुणवत्ता से खुला समझौता
PWD की महत्वाकांक्षी परियोजना में DPR को नजरअंदाज करने के आरोप, सॉफ्ट स्टोन और बिना WMM प्लांट के काम का दावा
भोपाल::लोक निर्माण विभाग (PWD) की नागौद से मैहर तक बन रही लगभग 150 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। दो जिलों को जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी सड़क में निर्माण गुणवत्ता से गंभीर समझौते के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि सड़क निर्माण में परसमनिया पहाड़ से निकाले गए सॉफ्ट चिप्स स्टोन (नरम पत्थर) को क्रश कर धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, जो मानकों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।
सूत्रों के अनुसार, सड़क के बेस लेयर कार्य में बिना WMM प्लांट के ही सूखी गिट्टी से वेट मिक्स मैकाडम (WMM) का कार्य दर्शाया जा रहा है। इसके ऊपर पन्ना जिले से लाई गई घटिया गुणवत्ता की गिट्टी और डामर की परत बिछाकर काम को तकनीकी रूप से पूर्ण दिखाया जा रहा है। आरोप है कि यह पूरा कार्य डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के प्रावधानों को दरकिनार कर किया जा रहा है।
इस पूरे मामले में एक चर्चित प्रभारी SDO की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि अधिकारी की कथित शह पर ठेकेदार को नियमों से हटकर काम करने की छूट दी जा रही है। बताया जा रहा है कि यही ठेकेदार रविशंकर जायसवाल पहले भी पन्ना जिले में 40 करोड़ की सकरिया–ककरहटी–गुनौर–डिघौरा सड़क और 82 करोड़ की पहाड़ीखेड़ा सड़क परियोजना में घटिया निर्माण को लेकर विवादों में रहा है। उन सड़कों की हालत कुछ ही महीनों में खराब हो गई थी, जिससे सरकार और विभाग की काफी किरकिरी हुई थी।
अब वही ठेकेदार सतना जिले की इस 150 करोड़ की परियोजना में भी पुराने तरीके अपनाने का आरोप झेल रहा है। विभागीय इंजीनियरों और ठेकेदार की मिलीभगत को लेकर सवाल इतने गंभीर हैं कि यदि इस परियोजना की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, तो कई अधिकारी और जिम्मेदार लोग कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री लगातार इंजीनियरों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर रहे हैं, लेकिन नागौद क्षेत्र में इन प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। जनता का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई जा रही सड़कें लंबे समय तक टिकने वाली नहीं होंगी, और एक बार फिर सरकारी धन बर्बाद होने की आशंका है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर पहले की तरह मामला दबा दिया जाएगा?
फिलहाल, जवाब भविष्य के गर्भ में है — लेकिन यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सड़क भी जल्द ही अपनी हकीकत खुद बयां कर सकती है।