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कोयलांचल पर कालिख पोत रही ‘छाई चोरी’  छोटू का अवैध कारोबार आखिर किसके संरक्षण में?

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कोयलांचल पर कालिख पोत रही ‘छाई चोरी’  छोटू का अवैध कारोबार आखिर किसके संरक्षण में?

अनूपपुर।

जिले के चचाई थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बरगवां, अमलाई, केल्हौरी, गाड़ाघाट सहित अन्य ग्रामीण अंचलों में इन दिनों कथित छाई (कोयला अवशेष) चोरी का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। इस पूरे अवैध धंधे का केंद्र बिंदु बना हुआ है एक नाम — छोटू, जो लंबे समय से इस कारोबार का इकलौता बादशाह बना बैठा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने वर्षों से चल रहे इस अवैध कारोबार पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या यह सब किसी राजनीतिक, प्रशासनिक या विभागीय छत्रछाया के बिना संभव है?

 

 

 

सुबह-सुबह खुलेआम चोरी, फिर भी कार्रवाई शून्य

 

स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 10 बजे तक दो ट्रैक्टरों के माध्यम से चोरी की छाई को खुलेआम मुख्य सड़कों से ईंट-भट्ठों तक पहुंचाया जाता है। यह पूरा खेल किसी छिपे रास्ते से नहीं, बल्कि आम जनता की आंखों के सामने होता है। हैरानी की बात यह है कि बीट प्रभारी ,थाना स्टाफ ,स्थानीय जिम्मेदार अधिकारी सभी को इस गतिविधि की जानकारी होने के बावजूद न तो वाहन रोके जाते हैं, न ही छापामार कार्रवाई होती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि “नजराना” व्यवस्था के चलते कार्रवाई से बचाव किया जा रहा है, ताकि अवैध कमाई का सिलसिला बाधित न हो।

 

 

अवैध ईंट-भट्ठे और पर्यावरण की हत्या

 

छोटू से जुड़े बताए जा रहे कई ईंट-भट्ठे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का खुलेआम उल्लंघन कर संचालित हो रहे हैं।

न तो हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) है

न ही धुएं और अपशिष्ट नियंत्रण की व्यवस्था आसपास के हरे-भरे पौधे सूखते जा रहे हैंमिट्टी की अंधाधुंध खुदाई से भारी-भरकम गड्ढे बन चुके हैं यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि भविष्य में गंभीर भू-धंसाव और जल संकट का कारण भी बन सकती है।

 

 

माइनिंग विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी

 

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खनन विभाग ,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्थानीय प्रशासनकी ओर से अब तक कोई ठोस निरीक्षण या दंडात्मक कार्रवाई सामने नहीं आई है।

जबकि नियमों के अनुसार:

बिना अनुमति मिट्टी उत्खनन अपराध है बिना पर्यावरण स्वीकृति ईंट-भट्ठा अवैध है चोरी की छाई का उपयोग दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है।

 

 

शासन को लाखों  के राजस्व का नुकसान

 

इस अवैध कारोबार के चलते शासन को कर, रॉयल्टी और पर्यावरण शुल्क का भारी नुकसान हो रहा है अवैध कारोबारियों की जेब भर रही है वहीं कानून का पालन करने वाले वैध कारोबारी हतोत्साहित हो रहे हैंयह स्थिति साफ तौर पर राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून व्यवस्था दोनों पर चोट है।

 

 

कोयलांचल बना अवैध कारोबारियों का सुरक्षित ठिकाना?

 

स्थानीय जनमानस में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कोयलांचल नगरी अवैध कारोबारियों के लिए सुरक्षित शरणस्थली बनती जा रही है।

छोटू जैसे कथित कारोबारी एक थाना क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बेखौफ होकर अपना नेटवर्क फैलाते जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की नजर उन तक क्यों नहीं पहुंच रही?या फिरनजर जानबूझकर फेरी जा रही है?  देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर ठोस कदम उठाता है या फिर कोयलांचल पर छाई यह कालिख और गहरी होती जाएगी।

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