Breaking News in Primes

शराब माफियाओं के खौफ़ में प्रशासन, शिक्षा से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक खुलेआम शराब बिक्री

0 11

शराब माफियाओं के खौफ़ में प्रशासन, शिक्षा से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक खुलेआम शराब बिक्री

 

ज्ञानेंद्र पांडेय 8516868379

अनूपपुर।

जिले में शराब बिक्री पर नियंत्रण के लिए बनाई गई मध्य प्रदेश की आबकारी नीति केवल कागज़ों में सिमटकर रह गई है। ज़मीनी हकीकत यह है कि शराब माफियाओं के दबदबे के आगे प्रशासन और आबकारी विभाग दोनों ही बेबस दिखाई दे रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि विद्यालयों, धार्मिक स्थलों और मुख्य मार्गों के किनारे तक खुलेआम शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं।

 

 

विद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों के पास धड़ल्ले से शराब बिक्री

 

नियमों के अनुसार शराब दुकानों को विद्यालयों, धार्मिक स्थलों व सार्वजनिक स्थानों से निर्धारित दूरी पर होना चाहिए, लेकिन अनूपपुर में यह नियम पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई दुकानें सीधे स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और मुख्य मार्गों के किनारे चल रही हैं, जिससे बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

 

 

सेल्समैनों का पुलिस रिकॉर्ड संदिग्ध

 

सूत्रों के अनुसार जिले की कई शराब दुकानों में काम करने वाले सेल्समैनों का थाना रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिलता। कुछ कर्मचारी ऐसे भी बताए गए हैं जो पूर्व में विभिन्न मामलों में न्यायालयों में उपस्थित हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कड़े नियमन में चलने वाली दुकानों में कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अधूरा क्यों है?

 

 

ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का साम्राज्य

 

कानूनी दुकानों के अलावा ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब की पैकरी बड़े पैमाने पर सक्रिय है। समाजसेवी संगठनों का दावा है कि अनूपपुर की अवैध शराब छत्तीसगढ़ और अन्य जिलों तक सप्लाई की जाती है। यह अंतर–राज्यीय नेटवर्क प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल देता है।

 

सीसीटीवी कैमरे बेअसर, कार्रवाई ठप

 

शराब दुकानों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को केवल दिखावा बताया जा रहा है। आबकारी विभाग के पास फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद किसी बड़ी कार्रवाई का अभाव विभागीय निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कैमरों की फुटेज खंगाली जाए तो माफिया से जुड़ी कई घटनाएँ सामने आ सकती हैं।

 

 

30 से 35 लाख रुपये तक ‘वजनदारी’ देने के आरोप

 

सूत्रों का दावा है कि जिले में शराब दुकानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक का ‘वजनदारी नजराना’ जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुँचाया जाता है।

इसी वजह से माफिया बेखौफ़ होकर घटनाएँ अंजाम देते हैं और कार्रवाई हमेशा “शिथिल” ही रह जाती है।

 

 

प्रशासनिक निरीक्षण हुआ तो खुलेंगी कई परतें

 

समाजसेवी मांग कर रहे हैं कि यदि प्रशासन सभी दुकानों का संयुक्त निरीक्षण कर दस्तावेज़, दूरी मानक, कर्मचारियों का सत्यापन और सीसीटीवी रिकॉर्ड की जाँच करे, तो बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ सामने आएंगी।

जिले में शराब बिक्री की वर्तमान स्थिति सरकार की शराब नीति और कानूनों को खुली चुनौती दे रही है।

 

 

दुकानों पर रेट लिस्ट और वैध बिल का अभाव

 

आबकारी विभाग द्वारा रेट लिस्ट और उपभोक्ता को बिल देने की अनिवार्यता के बावजूद कई दुकानों में इसका पालन नहीं हो रहा। बरगवां शराब दुकान में उपभोक्ताओं को फर्जी बिल थमाए जाने की शिकायतें मिली हैंन सील, न क्रमांक, न हस्ताक्षर। ऐसे फर्जी बिल चोरी अथवा अन्य अपराधों में उपयोग किए जाने का खतरा बढ़ाते हैं। बावजूद इसके कार्रवाई का न होना अधिकारियों की लापरवाही का प्रमाण माना जा रहा है।

 

 

स्थिति गंभीर, सख्त कदमों की ज़रूरत

 

अनूपपुर में शराब माफिया का बढ़ता प्रभाव सामाजिक व कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है।

यदि प्रशासन और आबकारी विभाग ने समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गहरी हो सकती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!