कौशांबी पुलिस अधीक्षक की मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल, कुर्सी से बड़ा दिल, फरियादी महिला के आंखों में बेबसी देखकर गाड़ी में बैठने से पहले रुके एसपी राजेश कुमार
News By- हिमांशु उपाध्याय/ नितिन केसरवानी
कौशाम्बी: मुख्यालय में जनसुनवाई समाप्त हो चुकी थी। पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार अपनी टीम के साथ वाहन में बैठने ही वाले थे, लेकिन तभी उनकी पैनी नजर भीड़ से अलग हटकर खड़ी एक पीड़ित महिला पर पड़ी चेहरे पर बेबसी, हाथ में कागज, और उम्मीद में उठी निगाहें और बस अगले ही पल वह हुआ जिसकी चर्चा अब पूरे जनपद में है जब एसपी राजेश कुमार तुरंत बिना किसी औपचारिकता के सीधे उस महिला के पास पहुँचे। भीड़ हैरान, सुरक्षा कर्मी हड़बड़ाए लेकिन एसपी साहब के कदमों में न रुकावट थी, न संकोच,महिला की बात सुनते हुए उनके चेहरे पर वही संवेदनशीलता झलक रही थी, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। अधिकारी नहीं,एक रक्षक की तरह अपने आपको समझा, महिला ने जब अपनी समस्या बताई तो एसपी ने उसी क्षण संबंधित विभाग व थानाध्यक्ष को कड़े शब्दों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। और अंत में उन्होंने महिला को भरोसा दिलाते हुए कहा कि आपकी समस्या का समाधान ज़रूर होगा। न्याय मिलेगा, यह मेरी ज़िम्मेदारी है। जनता के बीच यह दृश्य किसी खबर से बढ़कर था,यह भरोसा था कि न्याय व्यवस्था अब भी इंसानियत पर टिकी है।यह सबूत था कि पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार की नज़र सिर्फ केस फाइलों पर नहीं, इंसानी दर्द पर भी जाती है।