सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम में मातृशक्ति का सम्मान, नारी शक्ति की भूमिका पर वक्ताओं ने रखे विचार
खंडवा- संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विद्या भारती द्वारा आयोजित सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम में मातृशक्ति की बहुमुखी भूमिका पर विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए डॉ. पिंकी हार्डिया ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें परिवार की एकता और नारी की सृजनशीलता में निहित हैं। उन्होंने पंच परिवर्तन में मातृशक्ति की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि वक्ता मनीषा पाटिल ने कहा कि बालक के निर्माण की धुरी परिवार है और संस्कारवान परिवार ही सुदृढ़ समाज व राष्ट्र का निर्माण करता है। डॉ. अदिति पाराशर ने नारी की सात शक्तियों और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान पर अपना वक्तव्य दिया।
कार्यक्रम में संयुक्त परिवार, पर्यावरण संरक्षण, निस्वार्थ सेवा तथा विशेष उपलब्धि संतान की माता सहित विभिन्न श्रेणियों में मातृशक्ति का सम्मान किया गया। श्रीमती गायत्री व्यास ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में मातृशक्ति द्वारा आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियाँ दी गईं तथा रानी लक्ष्मीबाई और जीजाबाई के स्वरूपों की झांकी प्रस्तुत की गई।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का संचालन श्रीमती रश्मि सोनी ने किया और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। अंत में डॉ. पिंकी हार्डिया ने संकल्प पाठ करवाया और श्रीमती शालिनी चंदेल के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।