अनूपपुर में गांजा तस्करी का फैलता जाल
विकास, बबलू, छोटू खंडे और इंद्रपाल की जुगलबंदी से बेरोजगार युवा बन रहे 'कुर्बानी का बकरा'!
अनूपपुर में गांजा तस्करी का फैलता जाल
विकास, बबलू, छोटू खंडे और इंद्रपाल की जुगलबंदी से बेरोजगार युवा बन रहे ‘कुर्बानी का बकरा’!
ज्ञानेंद्र पांडेय 7974034465
अनूपपुर, जिले में गांजा तस्करी का काला कारोबार इन दिनों भयावह रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। नशे के इस अवैध व्यापार ने न केवल क्षेत्रीय युवाओं का भविष्य गर्त में धकेल दिया है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता और कानून-व्यवस्था की पोल भी खोल कर रख दी है।
इस संगठित अवैध नेटवर्क की कमान चार कुख्यात नामों के हाथों में है — छोटू, बबलू, विकास और इंद्रपाल, जो न केवल स्वयं इस गोरखधंधे को चला रहे हैं, बल्कि बेरोजगार और भोले-भाले युवाओं को पैसों का लालच देकर उनका जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
विकास सालों से फरार, फिर भी बेधड़क संचालन!
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गिरोह का मुख्य संचालक विकास, वर्षों से पुलिस की पकड़ से बाहर है, लेकिन फिर भी क्षेत्र में लगातार तस्करी का संचालन कर रहा है। वह 500 से 1000 रुपये का लालच देकर युवाओं को फर्जी कामों में फंसाता है, और जब वे पकड़े जाते हैं, तो स्वयं बच निकलता है।
छोटू खंडे-बबलू-इंद्रपाल तस्करी का त्रिकोण
इन चारों की गठजोड़ ने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है, जो गांजा की खरीद, भंडारण, आपूर्ति, डिलीवरी से लेकर युवा भर्ती तक का पूरा ढांचा संभाले हुए है। हर महीने लाखों की कमाई करने वाले इस गिरोह पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई न होना, प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है।
सिंघौरा गांजा तस्करों का ‘सेफ जोन’ बनता गाँव
अनूपपुर जिले की सीमावर्ती ग्राम पंचायत सिंघौरा, जो दो राज्यों की सीमा पर स्थित है, आज गांजा तस्करों के लिए सबसे सुरक्षित अड्डा बन चुका है। जंगलों और झाड़ियों से घिरा यह क्षेत्र कानून की पकड़ से बाहर लगता है, जहां तस्कर माल छिपाकर आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य में तस्करी कर रहे हैं।
हाल ही में अनूपपुर कोतवाली पुलिस द्वारा 6 किलो गांजे के साथ एक आरोपी पकड़ा गया था, लेकिन आज तक यह साफ नहीं हो पाया कि वह माल कहाँ से आया। सूत्र बताते हैं कि इसका सीधा लिंक झिरिया क्षेत्र से है, पर प्रशासनिक चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
पुलिस की चुप्पी जनता में बढ़ता आक्रोश
जिले के आम नागरिक अब पूछ रहे हैं:जब पूरा जिला जानता है कि तस्कर कौन हैं, तो क्या पुलिस और प्रशासन को नहीं मालूम?”क्या यह लापरवाही है या किसी रसूखदार का संरक्षण?”हर बार छोटे-मोटे युवक गिरफ्तार होते हैं, जिनका इस्तेमाल ये तस्कर केवल मोहरे के रूप में करते हैं। वहीं असली आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, संपत्ति जोड़ रहे हैं और नए बेरोजगारों को फंसाते जा रहे हैं।