News By- नितिन केसरवानी
टेढ़ीमोड़: सिराथू तहसील के कल्यानपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण को आए श्रद्धालुओं को कथा वाचक प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने कहा कि नारायण का नाम लेते ही मनुष्य के सारे पाप धूल जाते है और उसे मोक्ष की प्राप्ति जो जाती है। इसके लिए उन्होंने श्रद्धालुओं को अजामिल की कथा सुनाई । कथा वाचक ने बताया कि अजामिल एक सदाचारी और सद्गुणों वाला ब्राह्मण था। वह धर्म पारायण और सच्चा हृदय वाला व्यक्ति था। एक बार वह जंगल के रास्ते घर लौट रहा था तो उसने देखा कि एक व्यक्ति मदिरा पीकर एक वैश्या के साथ विहार कर रहा है।
यह अब देखने के बाद उसका भी मन विचलित हो गया। वह उस वैश्या को पाने लिए अपना सारा धन लूटा दिया यहां तक कि अपनी पतिव्रता पत्नी को भी त्याग दिया। अजामिल अब धर्म के रास्ते से विमुख हो चुका था। कुछ दिनों बाद उसके गांव में कुछ साधु आए तो अजामिल ने मन लगाकर उनका सेवा सत्कार किया। जब सभी संत जाने लगे तो अजामिल में कहा कि मैं कोई भगवान का भक्त नहीं हूं बल्कि मैं एक महापापी हूं और एक वैश्या के साथ रहता हूं। मैं आपको कोई दक्षिणा नहीं दे सकता। सारे साधु अजामिल की सेवा से प्रसन्न थे। इसलिए उन्होंने कहा कि हमें दक्षिणा में कुछ नहीं चाहिए। लेकिन तुम्हे अपना कल्याण चाहिए। तुम्हारे कितने बच्चे है।
अजामिल के यह बताने के पर को वैश्या से नौ बच्चे है और वह अभी गर्भवती है। तो संतों ने कहा इस बार जो संतान होगी उसका नाम तुम नारायण रखना। जब पुत्र हुआ तो उसका नाम नारायण रखा गया और वह उसे बड़े प्यार से नारायण कर बुलाता था। धीरे धीरे वह वृद्ध हो गया और उसकी मृत्यु को लेने के लिए यमराज के तीन दूत आए उन्हें देखकर अजामिल भयभीत हो गया और कुछ दूरी पर खेल रहे अपने पुत्र को नारायण नारायण कहकर पुकारने लगा। यह सुनकर भगवान विष्णु ने अपने दूतों को वहां भेजा जिन्होंने जाकर यमराज के दूतों से ऐसा करने से मना किया कि वह इस समय नारायण का नाम ले रहा है। इस चार शब्द ने इसके सारे पाप धूल दिए और इसने सभी जन्मों का प्रायश्चित कर लिया है। क्योंकि इसने विवश होकर ही सही अंतिम समय में भगवान के कल्याणकारी नाम का उच्चरण किया है।