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वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व पसंद आ रहा बाघिन कजरी को, लगातार कर रही शिकार

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दमोह

दमोह पेंच टाइगर रिजर्व से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन यहां के माहौल में काफी घुलमिल गई है। बाघिन लगातार शिकार कर अपना पेट भर रही है। ऐसा लगने लगा है यह बाघिन भी यहां के जंगल को बहुत ज्यादा आबाद करेगी।

बता दें रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व ऐसा रिजर्व क्षेत्र है, जहां की जलवायु और प्राकृतिक धरोहर जंगली जानवरों के रहवास का सबसे अच्छा स्थान है। यहां की जलवायु जानवरों के लिए फायदेमंद है। चाहे वह जानवर शाकाहारी हो या फिर मांसाहारी जो भी इस क्षेत्र में पहुंच जाता है वह अपना रहवास ही बना लेता है। यह प्रक्रिया वर्ष 2018 के बाद से लगातार देखते आ रहे हैं। जब यहां के नौरादेही अभ्यारण्य में पहली बार बाघ और बाघिन को लाया गया और छह साल के अंदर यहां 20 से अधिक बाघ हो गए। उनके भोजन की पर्याप्त व्यवस्था इस रिजर्व क्षेत्र में उपलब्ध है।

इन्होंने बना लिया रहवास
वर्ष 2018 में बाघिन राधा के दो महीने बाद एक बाघ को लाया गया था। उसको बाड़े में रखा गया था और दो दिन बाद ही उसने बाड़ा तोड़ लिया था, लेकिन वह स्थान छोड़कर नहीं भागा था। कजरी बाघिन जिसको बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लाया गया था उसे डोगरगांव रेंज के खापा नामक स्थान जो ब्यारमा नदी के समीप है वहां छोड़ा गया था। कजरी ने अपना स्थान तीसरे दिन ही छोड़ दिया था। उसके बाद वह कई दिनों तक दमोह जिले की सीमा में घूमती रही। बाद में तेजगढ़ रेंज के जंगली क्षेत्र में उसका रेस्क्यू किया गया और उसको उसके मूल स्थान पर छोड़ा गया।

वीरांगना टाइगर रिजर्व में बनेगा बसेरा
बाघिन कजरी की हरकते देखने से ऐसा लग रहा था यहां बाघिन रुकेगी नहीं, लेकिन उसके बाद वह रुक गई और आज भी उसी रेंज में रुकी हुई है। अभी कुछ दिन पूर्व एक और बाघिन को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया गया। उसको नौरादेही में छोड़ा जो आज भी उसी क्षेत्र में रुकी हुई है। अनुमान यह लगाया जा रहा है कि बाघिन अब वीरांगना टाइगर रिजर्व में अपना बसेरा बना लेगी।

यह है खासियत
वीरांगना टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यह टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के सागर, दमोह, और नरसिंहपुर ज़िलों में फैला है और दमोह के तेंदुखेड़ा ब्लॉक का 80 प्रतिशत हिस्सा इस टाइगर रिजर्व में शामिल हो गया है। यह टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश का सातवां बाघ टाइगर रिजर्व है। इस टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए बेहद अनुकूल वातावरण है और बेहतरीन रहवास के लिए स्थान है। गर्मियों से राहत पाने के लिए बड़ी-बड़ी नदी हैं, जिसमें बारह माह पानी भरा रहता है। बाघिन राधा, कजरी के बाद पेंच रिर्जव क्षेत्र से लाई गई बाघिन भी नौरादेही के जंगलों में रम गई है और अब वह यहीं रुकेगी, जिसकी उम्मीद विभाग के अधिकारी लगा रहे हैं। नौरादेही के उपवनमंडल अधिकारी प्रतीक दुबे ने बताया एन 6 को पेंच से वीरांगना टाइगर रिजर्व लाये दो सप्ताह होने को हैं। बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है और अपने भोजन के लिए वह शिकार कर रही है। उसकी मॉनिटरिंग आईडी कॉलर से लगातार की जा रही है।

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