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मूवी रिव्यू: औरों में कहां दम था

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अजय देवगन और तब्बू जैसे नामी सितारों से सजी फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ को पहले इसी साल अप्रैल के महीने में रिलीज किया जाना था, लेकिन लोकसभा चुनावों के कारण फिल्म टल गई। दोबारा फिल्म की रिलीज डेट 5 जुलाई घोषित की गई, लेकिन अबकी बार निर्माताओं ने प्रभास की फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ के धमाकेदार प्रदर्शन से घबराकर फिल्म को पोस्टपोन कर दिया। आखिरकार इस फिल्म को इस हफ्ते बिना किसी प्रमोशन के रिलीज कर दिया गया। बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद इस फिल्म के लिए महज 7 हजार लोगों ने एडवांस बुकिंग की, वहीं सुबह के शोज में भी चुनिंदा दर्शक ही सिनेमा पहुंचे।

‘औरों में कहां दम था’ की कहानी

यह लवस्टोरी फिल्म साल 2001 से 2024 के पीरियड में एक कपल कृष्णा (अजय देवगन) और वसुधा (तब्बू) की मोहब्बत की दास्तान कहती है। मुंबई की एक चॉल में एक-दूसरे के पड़ोसी कृष्णा और वसुधा एक दूसरे को बेहद चाहते हैं। कृष्णा को कंपनी की ओर से जर्मनी जाने का ऑफर मिला है। वे दोनों अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे हैं। कुछ दिनों पहले कृष्णा का अपने ही इलाके में रहने वाले कुछ बदमाशों से झगड़ा हुआ था। उसे सबक सिखाने के लिए वे बदमाश एक रात अकेली घर लौट रही वसुधा को निशाना बनाते हैं। वसुधा की चीख सुनकर कृष्णा वहां पहुंचता है और गुस्से में दो बदमाशों को मौत के घाट उतार देता है।

कृष्णा को उम्र कैद की सजा हो जाती है। वसुधा अब कृष्णा की रिहाई का इंतजार करना चाहती है, लेकिन वह उसे किसी ओर से शादी करने के लिए मना लेता है। अच्छे व्यवहार की वजह से कृष्णा की सजा दो साल कम हो जाती है। जेल से बाहर आने पर उसका सामना वसुधा से होता है। अभिजीत (जिमी शेरगिल) से शादी कर चुकी वसुधा आज भी कृष्णा को भुला नहीं पाई है। लेकिन अब कहानी में आगे क्‍या होता है, इस लव स्टोरी का अंजाम जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा।

‘औरों में कहां दम था’ मूवी रिव्‍यू

फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ के डायरेक्टर और राइटर नीरज पांडे को अपनी शानदार थ्रिलर फिल्मों के लिए जाना जाता है। पहली बार रोमांटिक जॉनर में उतरे नीरज ने रोमांस में भी थ्रिलर का एंगल डालने की भरपूर कोशिश की, लेकिन अफसोस कि इस चक्कर में वह रोमांस और थ्रिलर में उलझकर रह गए। खासकर फिल्म की कहानी बेहद कमजोर है। फिल्म की शुरुआत ठीकठाक अंदाज में होती है और कृष्णा-वसुधा की लव स्टोरी आपको एक खूबसूरत फिल्म की उम्मीद जगाती है, वहीं जेल में सजा काट रहे अजय देवगन की चुप्पी किसी रहस्य की ओर इशारा करती है। लेकिन इस दौरान फिल्म की धीमी रफ्तार और बार- बार आने वाले गाने आपके सब्र का इम्तहान लेते हैं।

इंटरवल तक बतौर दर्शक आप किसी चमत्कार की उम्मीद में फिल्म देखते हैं। लेकिन उसके बाद बार-बार रिपीट होने वाले दृश्य आपकी सारी उम्मीदें तोड़ देते हैं। फिल्म के क्लाईमैक्स में करीब ढाई घंटे के बाद आप खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

बात अगर एक्टिंग की करें तो अजय देवगन और तब्बू ने अपनी रहस्यमयी चुप्पी से फिल्म में जान डालने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन हकीकत में फिल्म में उनसे ज्यादा फुटेज उनके जवानी के किरदारों को मिली है। उनकी जवानी के दिनों के किरदार में नजर आए शांतनु माहेश्वरी और सई मांजरेकर की जोड़ी पर्दे पर खूब जंचती है। खासकर शांतनु ने पर्दे पर कमाल की एक्टिंग की है। लवर बॉय से लेकर एंग्री यंग मैन तक के शेड्स में वह जमे हैं।

चुनिंदा दृश्यों में नजर आए जिमी शेरगिल भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं। लेकिन अफसोस कि कमजोर कहानी के कारण किरदारों की मेहनत बेकार चली गई। लव स्टोरी फिल्म में बेहतरीन म्यूजिक की काफी गुंजाइश होती है, लेकिन इस फिल्म का संगीत कुछ खास नहीं है। फिल्म की सिनेमटोग्रफी और बैकग्रांउड स्कोर भी औसत है।

क्‍यों देखें- अगर आप लव स्टोरी वाली फिल्मों के शौकीन हैं, अजय देवगन और तब्बू के फैन हैं तो इस फिल्म का टिकट कटा सकते हैं। वरना इस फिल्म में ऐसा कुछ खास नहीं है, जिसके लिए आप पैसे खर्च करें।

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