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पीएम मोदी का यूक्रेन दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक, मिले जेलेंस्की से, गले लगाया, फिर टिकाए रखा कंधे पर हाथ

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नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूक्रेन दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने यूक्रेन का दौरा किया। पीएम मोदी का दौरा ऐसे वक्त में हो रहा जब यूक्रेन सबसे गहरे संकट से गुजर रहा है। इस दौरान पीएम मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की मुलाकात काफी भावनात्मक रही। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने पहले हाथ मिलाया फिर एक दूसरे को गले लगा लिया। इस दृश्य ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत यूक्रेन की पीड़ा को समझता है और उसके संघर्ष में उसके साथ खड़ा है।

पीएम मोदी और जेलेंस्की ने कीव के ‘मार्टीरोलॉजिस्ट एक्जपोसीशन’ का दौरा किया। यहां पीएम मोदी ने युद्ध की विभीषिका को करीब से देखा। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी का हाथ जेलेंस्की के कंधे पर मजबूती से टिका हुआ था। जेलेंस्की के लिए भी यह दौरा बहुत महत्वपूर्ण था। कुछ ही समय पहले जब प्रधानमंत्री मोदी ने रूस का दौरा किया था, तो जेलेंस्की ने उनकी और राष्ट्रपति पुतिन की तस्वीरों पर नाराजगी जताई थी। लेकिन कीव में हुई इस मुलाकात ने उन सभी विवादों को पीछे छोड़ते हुए दोनों देशों के बीच एक नए तालमेल को जन्म दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह कीव पहुंचे और दिन में ‘ओएसिस ऑफ पीस’ पार्क में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “महात्मा के शांति के शाश्वत संदेश को याद करते हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कीव में ‘ओएसिस ऑफ पीस’ पार्क में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।” ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच पीएम मोदी ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और वैश्विक संघर्षों पर भारत की स्थिति को दोहराते हुए कहा, “यह युद्ध का समय नहीं है। यह समय है एकजुट होकर उन चुनौतियों का सामना करने का, जो मानवता के लिए खतरा हैं।” उनका यह बयान स्पष्ट रूप से भारत के शांतिपूर्ण और कूटनीतिक रुख को दर्शाता है।

जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में महात्मा के शांति के शाश्वत संदेश की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। इससे पहले पीएम मोदी के यहां पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक, व्यापार, आर्थिक, निवेश, शिक्षा, सांस्कृतिक, और मानवीय सहायता जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह उस समय हो रही थी, जब पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस की आक्रामकता की निंदा करने का दबाव बनाया था। लेकिन भारत ने अपने तटस्थ रुख को बनाए रखा और दोनों देशों के बीच संबंधों को संतुलित किया।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य न केवल तनाव को कम करना था, बल्कि शांति और सहयोग की दिशा में नए कदम उठाना भी था। पूर्व भारतीय राजदूत स्कंद रंजन तयाल का कहना है कि पीएम मोदी जेलेंस्की को यह संदेश देंगे कि भारत यूक्रेन के लोगों के साथ दोस्ती और सहयोग के पथ पर चलने के लिए तैयार है।

पीएम मोदी का यह दौरा केवल सात घंटे का था लेकिन इन कुछ घंटों में उन्होंने यूक्रेन के लोगों के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ी है। भारत और यूक्रेन के बीच इस ऐतिहासिक मिलन ने न केवल दोनों देशों के संबंधों को नया आयाम दिया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि जब दुनिया में कहीं भी मानवता पर संकट आता है, तो भारत उसके साथ खड़ा होता है।

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